1947 के बंटवारे पर बनी यह फिल्म एक ऐसी युवती की कहानी है, जिसे अपहरण के बाद अपना ही परिवार ठुकरा देता है. दंगे, मजहबी नफरत और इंसानियत के बीच उसका फैसला कहानी को बेहद भावुक और सस्पेंसफुल बनाता है…
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