नाना पाटेकर की ‘प्रतिघात’ में भूमिका छोटी थी, लेकिन इसी किरदार में उनकी अलग तरह की एक्टिंग साफ नजर आती है. आगे ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों ने इस पहचान को और मजबूत किया. नाना की सबसे बड़ी खूबी यही रही कि वह किरदार के हिसाब से खुद को बदल लेते थे और स्क्रीन पर नाना नहीं…
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नाना के जाने के बाद फिर देखिए ‘प्रतिघात’… समझ आ जाएगा, वो इतने बड़े एक्टर क्यों थे!
