न लर्निंग लाइसेंस बनवाने की जरूरत, न ड्राइविंग टेस्ट देने का झंझट। बस एक ऑनलाइन फोटो, कुछ फर्जी दस्तावेज…और आपके हाथ में होगा एक असली ड्राइविंग लाइसेंस, जो भारत के किसी भी कोने में मान्य होगा। मप्र के आरटीओ यानी क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय इसी तरह बिना जांच पड़ताल के फर्जी लाइसेंस जारी कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने जब इस मामले की पड़ताल की तो पाया कि 100 से ज्यादा फर्जी लाइसेंस केवल इंदौर और उज्जैन आरटीओ से जारी हो चुके हैं। प्रदेश के बाकी आरटीओ के रिकॉर्ड की जांच की जाए तो ये आंकड़ा इससे ज्यादा हो सकता है। ये खेल तब से शुरू हुआ है जब से परिवहन विभाग की प्रक्रिया ऑनलाइन हुई है। भास्कर की पड़ताल के बाद परिवहन विभाग के अफसरों ने जांच की…
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