क्या खूब इत्तेफाक है. मौत का दिन भी रविवार. जिंदगी का दिन भी रविवार. डूबते सूरज के साथ सिद्धू मूसेवाला की जिंदगी डूबी थी. फिर 658 दिन बाद उगते सूरज के साथ फिर से एक जिंदगी उगी. ठीक 658 दिन बाद सिद्धू मूसेवाला लौट आया. उसका पुनर्जन्म हो चुका है…
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कुदरत का करिश्मा, मां-बाप की जिद और जज्बा… मूसेवाला के घर नए मेहमान के आने की पूरी कहानी
