पाकिस्तान में लोग हमें काफिर कहते थे। कभी किसी त्योहार पर तिलक लगाकर बाहर नहीं निकल पाए। अगर निकलते तो लोग घूरते थे। बाबरी मस्जिद विवाद के बाद हमारे घर पर पत्थर बरसाए गए थे। मोहल्ले के ही एक मुस्लिम परिवार ने जान बचाई। इसके बाद सीधे भारत आ गए और चैन की सांस ली। अब वहां सपने में भी जाने की नहीं सोचते। इसी साल फरवरी में भारत की नागरिकता भी मिल गई। इतना कहते-कहते 40 साल के राजेश मेघवाल के चेहरे का भाव पूरी तरह बदल जाता है। उनके चेहरे पर वही पुराना खौफ एक बार फिर तैर जाता है। पहलगाम (कश्मीर) हमले के बाद एक बार फिर से भारत-पाकिस्तान के बीच तनातनी की स्थिति है। ऐसे में दैनिक भास्कर पाकिस्तान से आए उन परिवारों के बीच पहुंचा…
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‘पाकिस्तान में तिलक लगाकर निकलते तो लोग घूरते थे’:राजस्थान आया परिवार बोला
