एसआईटी रिपोर्ट में कहा गया है कि 2004 से 2008 के बीच सबरीमला मंदिर के पुजारी के सहायक के रूप में काम करने वाले पोट्टी को पता था कि द्वारपालक की मूर्तियों की तांबे की प्लेट पर सोना मढ़ा गया था. उसने इस जानकारी का इस्तेमाल धोखाधड़ी और आर्थिक लाभ पाने के इरादे से किया…
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