सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि गाली-गलौज या अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना हमेशा अश्लीलता के दायरे में नहीं आता है। शुक्रवार को जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि कोई शब्द तभी अश्लील माना जाएगा, जब वह कामुकता को बढ़ावा देने वाला हो या लोगों को भ्रष्ट करने की प्रवृत्ति रखता हो। कोर्ट ने यह टिप्पणी तमिलनाडु के एक मामले में सुनवाई के दौरान की। आरोपी मणि को जमीन विवाद के दौरान मां की गाली देने के लिए अश्लीलता के आरोप में दोषी ठहराया गया था। जमीन के विवाद में गाली-गलौज और जातिसूचक शब्द बोले थे अगस्त 2017 में जमीन विवाद को लेकर आरोपी ने शिकायतकर्ता के साथ गाली-गलौज की थी। पीड़ित का आरोप था कि आरोपी ने जातिसूचक शब्दों भी कहे। बाद में घर से हथियार लाकर हमला कर दिया…
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सुप्रीम कोर्ट बोला
