प्रदेश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान चल रहा है। चुनाव आयोग के बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) ने एसआईआर फॉर्म भरवाने के लिए अपनी जान झोंक दी है। भाजपा, सपा और बसपा को छोड़कर अन्य राजनीतिक दल एसआईआर में ज्यादा दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस अभियान ने पोलिंग बूथों पर राजनीतिक दलों की ताकत की हकीकत की पोल भी खोल दी है। देश की सबसे पुरानी कांग्रेस पार्टी के पास यूपी के 17 जिलों में बूथ पर कोई एजेंट (बीएलए) तक नहीं है। कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में तीन दशक तक विराजमान रही है। वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने…
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आजम के रामपुर में सपा का एक BLA नहीं:कानपुर में बसपा जीरो; ढाई हजार बूथ पर भाजपा के एजेंट नहीं
