CJI सूर्य कांत ने गुरुवार को कहा कि न्याय तक पहुंच बढ़ाने के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए, लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जजों की कानूनी समझ या फैसला लेने की क्षमता की जगह नहीं ले सकता। यह काम जजों के पास ही रहना चाहिए। CJI उज्बेकिस्तान के समरकंद में ‘एसोसिएशन ऑफ एशियन कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट्स एंड इक्विवेलेंट इंस्टीट्यूशंस’ के 7वें सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे। CJI ने कहा कि अदालतों के सामने चुनौती यह है कि वे अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए टेक्नोलॉजी को अपनाएं। जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का नजरिया डिजिटाइजेशन को केवल मौजूदा प्रक्रियाओं को कंप्यूटर पर लाने तक सीमित नहीं रखता। इसका मकसद प्रोसेस को जरूरतों के हिसाब से नए तरीके से तैयार करना है। डिजिटल बदलाव से अदालतों तक आसान पहुंच जस्टिस सूर्यकांत ने भारत में न्याय व्यवस्था के डिजिटल बदलाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ई-फाइलिंग…
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एआई कोर्ट का मददगार, लेकिन जज नहीं बन सकता:समरकंद में CJI सूर्यकांत बोले
