संसद का मानसून सत्र शुरू होने से तीन दिन पहले 18 जुलाई को जस्टिस यशवंत वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने इन-हाउस कमेटी की रिपोर्ट और महाभियोग की सिफारिश रद्द करने का अनुरोध किया। जस्टिस वर्मा का तर्क है कि उनके आवास के बाहरी हिस्से में नकदी बरामद होने मात्र से उनका इस मामले में शामिल साबित नहीं करती। क्योंकि आंतरिक जांच समिति ने यह तय नहीं किया कि नकदी किसकी है या परिसर में कैसे मिली। समिति के निष्कर्षों पर सवाल उठाते हुए उनका तर्क दिया है- ये अनुमान पर आधारित हैं। याचिका में जस्टिस वर्मा का नाम नहीं है…
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