जरा सोचकर देखिए किसी ने सत्संग जैसे पावन आयोजन में आने से पहले सोचा भी नहीं होगा कि तमाम कोनों से जुटी संगत में इतना बड़ा नरसंहार हो जाएगा. इसमें लापरवाही किसी की भी हो, लेकिन इन आयोजनों में भीड़ के मनोविज्ञान को समझना और उसे काबू करना एक चुनौती होता है…
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क्या हाथरस हादसे में जानलेवा भगदड़ रोकी जा सकती थी, कैसे काम करता है भीड़ का मनोविज्ञान?
