बीजेपी के 45 साल के इतिहास में कभी अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला नहीं हुआ. हमेशा ‘सर्वसम्मति’ से नाम तय किया गया. औपचारिक प्रक्रिया जरूर होती है सदस्यता अभियान, फिर मंडल, जिला, क्षेत्र और राज्य स्तर के चुनाव. लेकिन शीर्ष पद पर पहुंचते-पहुंचते मतभेद गायब हो जाते हैं…
Read More
'डिफरेंस' की रणनीति से सहमति की राजनीति तक…कैसे बदला बीजेपी का चरित्र?
