क्रिस्टीन फेयर ने अपने आर्टिकल में लिखा, ‘पिछले कुछ वर्षों में मुझे वॉशिंगटन में भारतीय दूतावास के कई अधिकारियों से मिलने का मौका मिला है. सभी ने कभी न कभी एक ही सवाल पूछा कि आखिर अमेरिकियों को पाकिस्तानी धोखा कैसे देते रहते हैं…
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