बस्तर में नक्सल आतंक का चेहरा रहा पापाराव अब सरेंडर कर चुका है। सरेंडर के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उसने माना कि रास्ता गलत था। पापाराव ने कहा कि, जिन परिवारों ने अपनों को खोया, उनसे माफी मांगना चाहता हूं। पापाराव का जन्म सुकमा जिले के एक छोटे से गांव में हुआ था। 17-18 साल की उम्र में नक्सलियों की नजर उस पर पड़ी। एक दिन कुख्यात नक्सली लीडर रमन्ना उसे अपने साथ जंगलों में ले गया। पापाराव करीब 30-31 साल तक नक्सल संगठन से जुड़ा रहा। पार्टी सदस्य से लेकर DKSZCM कैडर तक पहुंचा। पश्चिम बस्तर डिवीजन का इंचार्ज रहा। उस पर 25 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक…
Read More