कुछ दिन पहले ही मुझे सोमनाथ की पवित्र भूमि पर सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में हिस्सा लेने का सुअवसर मिला। इस क्षण का साक्षी बनने के लिए देश के कोने-कोने से लोग सोमनाथ पहुंचे। इस कार्यक्रम के दौरान मेरी मुलाकात कुछ ऐसे लोगों से भी हुई, जो इससे पहले सौराष्ट्र-तमिल संगमम के दौरान सोमनाथ आए थे और इससे पहले काशी-तमिल संगमम के समय काशी भी गए थे। ऐसे मंचों को लेकर उनकी सकारात्मक सोच ने मुझे बहुत प्रभावित किया। इसलिए मैंने तय किया कि क्यों ना इस विषय पर अपने कुछ विचार साझा करूं। ‘मन की बात’ के एक एपिसोड के दौरान मैंने कहा था कि अपने जीवन में तमिल भाषा न सीख पाने का मुझे बहुत दु:ख है। यह हमारा सौभाग्य है कि बीते कुछ वर्षों से हमारी सरकार तमिल संस्कृति को देश में और लोकप्रिय बनाने में निरंतर जुटी है। यह ‘एक भारत…
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