जहां हमारा बेस था, वहां हमने ट्रेंचेज बनाए थे। जमीन में गड्ढे या खंदक को ट्रेंचेज कहते हैं। हमारे लिए खाना लेकर आर्मी की गाड़ी आती थी। सायरन बजाती थी। हमारे पास एक मिनट होता था खाना लेने के लिए। खाना लेकर भागकर हम फिर ट्रेंचेज में लौटते थे…
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पूर्व सैनिक बोले-रात; भारत-पाक युद्ध
