विश्व जल दिवस पर ‘जल है तो कल है’ जैसे नारे सुनने में तो अच्छे लगते हैं, लेकिन जमीन पर हकीकत आज भी बहुत कड़वी है. सरकारी कागजों में ‘हर घर जल’ के बड़े-बड़े दावे तो दिखते हैं, पर असलियत में आज भी लोगों को प्यास बुझाने के लिए दूर-दूर तक पैदल चलना पड़ रहा है…
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फाइलों में 'हर घर जल', पर विदर्भ से बुंदेलखंड तक 'प्यासा' है भारत!
