सुप्रीम कोर्ट में बिहार में चुनाव आयोग की Special Intensive Revision प्रक्रिया पर सुनवाई में पहचान पत्रों की संख्या बढ़ाने, नागरिकता प्रमाण, और दस्तावेजों के सोर्स की विश्वसनीयता पर बहस हुई. कोर्ट ने आंकड़ों की स्पष्टता मांगी और कहा कि एसआईआर तो वोटर-फ्रेंडली है, जबकि याचिकाकर्ता ने दो महीने में प्रक्रिया पूरी करने के मामले पर सवाल उठाया और इसे एक साल में करने का सुझाव दिया…
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