कहते हैं मौजूदा संसद सत्र में ही केंद्र सरकार वन नेशन, वन इलेक्शन विधेयक पेश कर सकती है। सरकार का कहना है कि वह इस विधेयक पर आम सहमति बनाना चाहती है। हो सकता है यह विधेयक जेपीसी यानी ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को भेजा जाए ताकि इस पर व्यापक विचार-विमर्श हो सके। विचार अच्छा है और किफ़ायती भी। क्योंकि बार- बार के चुनावों से लोग तंग आ चुके हैं और बेपनाह चुनाव खर्च से मुक्ति का ज़रिया भी यही है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता वाली कमेटी को यह काम सौंपा गया था। उन्होंने सिफ़ारिश की है कि सभी विधानसभाओं का कार्यकाल 2029 तक बढ़ा-घटा दिया जाए और लोकसभा के साथ फिर सभी विधानसभाओं के एक साथ चुनाव करवा लिए जाएँ। इसी तरह बाद में नगरीय निकायों के चुनावों की भी तारीख़ निश्चित करके वन नेशन…
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भास्कर ओपिनियन:वन नेशन, वन इलेक्शन आख़िर कितना कारगर!
