मायावती 27 साल की थीं। वह सीधे लोकसभा चुनाव में उतर गईं। सामने पूर्व उप-प्रधानमंत्री जगजीवन राम की बेटी मीरा कुमार चुनाव मैदान में थीं। मायावती राजनीतिक परिवार से नहीं थीं। इसलिए लोग जानते भी नहीं थे। उस वक्त बहुजन समाज पार्टी का गठन तो हो गया था लेकिन चुनाव आयोग में पार्टी का दर्जा नहीं था। मायावती की पहचान निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में थी। चुनाव हुआ। रिजल्ट आया। मायावती हार गईं। लेकिन इतने वोट मिले कि जीतने वालों ने भी मान लिया कि मायावती आगे चलकर बड़ा उलटफेर कर सकती हैं। हुआ भी कुछ ऐसा ही। 4 साल बाद 1989 में इसी सीट पर मायावती दोबारा प्रत्याशी बनीं और संसद तक पहुंचीं। 6 साल बाद वह प्रदेश की पहली मुख्यमंत्री बनीं। आज भास्कर की स्पेशल सीरीज चुनावी किस्सा में मायावती के पहले चुनाव का सिलसिलेवार किस्सा। आखिर कैसे ताकतवर प्रत्याशियों के खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा…
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मायावती पहले चुनाव में साइकिल से प्रचार करतीं थीं:दिग्गजों से था मुकाबला; सीएम तक ने विरोध में सभा की; 10 साल बाद खुद सीएम बनीं
