रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि वे प्रेमानंद जी से कोई द्वेष नहीं रखते. लेकिन वह उन्हें न तो विद्वान मानते हैं और न ही चमत्कारी. उन्होंने कहा, “चमत्कार उसको कहते हैं जो शास्त्रीय चर्चा पर सहज हो और श्लोकों का अर्थ ठीक से बता पाए…
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रामभद्राचार्य ने आगे कहा कि वे प्रेमानंद जी से कोई द्वेष नहीं रखते. लेकिन वह उन्हें न तो विद्वान मानते हैं और न ही चमत्कारी. उन्होंने कहा, “चमत्कार उसको कहते हैं जो शास्त्रीय चर्चा पर सहज हो और श्लोकों का अर्थ ठीक से बता पाए…
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