सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा, ‘‘विवाह आपसी विश्वास, साहचर्य और साझा अनुभवों पर बना एक रिश्ता है. जब ये आवश्यक तत्व लंबे समय तक गायब रहते हैं तो वैवाहिक बंधन किसी भी सार से रहित केवल कानूनी औपचारिकता बनकर रह जाता है.’’…
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