नए कपड़ों से घी और सेंट की खुशबू न आए तो कोई पहचान ही नहीं सकता कि वे श्मशान के हैं। लोग इन्हें पूजा-पाठ और शादियों में पहनते हैं। लेन-देन में दिए जाने वाले कपड़े भी यही होते हैं। इंदौर के एक श्मशान घाट का एजेंट दिलीप माने यह बात बेशर्मी से कहता है। वह उस संगठित गिरोह का हिस्सा है…
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