खीचन (फलाेदी) के 43 साल के सेवाराम। जैसा नाम, वैसा काम। पेशे से मजदूर सेवाराम 27 साल से पक्षियों की सेवा में जुटे हैं। इस दौरान 3 हजार कुरजा का रेस्क्यू किया। इनके प्रयासों से पक्षियों की राह में आने वाले बिजली के तार भी अंडरग्राउंड हो गए। सेवाराम ने अपना घर भी हर साल साइबेरिया से आने वाली ‘डेमोइसेल क्रेन’ (कुरजां भी कहते हैं) के लिए समर्पित कर दिया है। उनका यह घर टूरिस्ट स्पॉट बन गया है। सेवाराम की सेवा के किस्से रूस…
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साइबेरियन पक्षियों के लिए घर को बनाया टूरिस्ट स्पॉट:3 हजार को बचाया, पेशे से मजदूर सेवाराम की पक्षी सेवा के किस्से अमेरिका तक पहुंचे
