सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की शक्ति न तो जजों की निजी सुरक्षा का कवच है और न ही आलोचना को दबाने का हथियार। अदालत ने कहा- न्याय में दया और क्षमा भी उतनी ही अहम है, खासकर तब जब व्यक्ति अपनी गलती स्वीकार कर ले। यह टिप्पणी जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट के एक आदेश को पलटते हुए दी। इस फैसले में एक महिला को स्वतः संज्ञान लेते हुए क्रिमिनल कंटेम्प्ट मामले में एक हफ्ते की जेल और ₹2,000 जुर्माने की सजा दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला ने अपनी गलती स्वीकार कर माफी मांगी थी…
Read More
सुप्रीम कोर्ट बोला-कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट आलोचना दबाने का हथियार नहीं:बॉम्बे हाईकोर्ट से 1 हफ्ते की सजा पाने वाली महिला को राहत
