सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यौन अपराधों की रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि सनसनीखेज हेडलाइन, यौन हिंसा का ग्राफिक या भड़काऊ जानकारी जनहित में नहीं है। इससे पीड़ितों और उनके परिवारों को गंभीर मानसिक आघात पहुंच सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी गैंगरेप से जुड़े तीन मामलों की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने इन मामलों पर खुद नोटिस लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रिंट…
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