राजनीतिक दलों की ताकत का पुराना आधार संगठन और कार्यकर्ता रहे हैं। अब इनके समानांतर कंटेंट क्रिएटर्स और माइक्रो इंफ्लूएंसर्स की ‘डिजिटल फौज’ खड़ी हो रही है। इनके पास न पार्टी का पद है, न झंडा। लेकिन, हजारों-लाखों स्क्रीन तक पहुंच है। युवा आंदोलनों ने इसकी ताकत दिखा दी है। आंदोलन की सूचना…
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सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल प्रचार का ट्रेंड:एक रील के मिलते हैं ₹50 हजार, स्थानीय इंफ्लूएंसर पार्टियों के रडार पर
