सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि शादी धार्मिक कार्य नहीं है इसलिए विवाह के लिए मंदिर में दान दिए धन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मंदिरों के फंड से मैरिज हॉल नहीं बनाए जा सकते। ये कोई सरकारी फंड नहीं है। मद्रास हाईकोर्ट ने 19 अगस्त को मंदिरों के फंड से मैरिज हॉल बनाने की अनुमति देने वाले सरकारी आदेश को रद्द कर दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने याचिकाकर्ताओं की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी से पूछा- यदि मंदिर परिसर में शादी पार्टी चल रही है और अश्लील गाने बजाए जाएंगे…
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