दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को देश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की वकालत की। कोर्ट ने कहा कि पर्सनल लॉ बाल विवाह की परमिशन देता है, जबकि पॉक्सो एक्ट, BNS में यही अपराध है। इन कानूनों के बीच बार-बार होने वाले टकराव को देखते हुए इसकी कानूनी रूप से स्पष्ट व्याख्या जरूरी है। जस्टिस अरुण मोंगा ने पूछा कि अक्सर हम इस दुविधा में आ जाते हैं कि क्या समाज को लंबे समय से चले आ रहे पर्सनल लॉ का पालन करने के लिए अपराधी बनाया जाना चाहिए। जस्टिस मोंगा ने कहा कि क्या अब UCC की तरफ बढ़ने का समय नहीं आ गया है। जिसमें एक ऐसा ढांचा बनाया जाए…
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