उत्तराखंड में अब अगर आप सड़क पर चलते हैं तो भालू, गुलदार या हाथी आपको कभी भी दिख सकते हैं। जंगलों से निकलकर जंगली जानवर गांव, कस्बों और शहरों तक पहुंच गए हैं और राज्य मानो एक ओपन सफारी में तब्दील हो गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि गढ़वाल के सांसद अनिल बलूनी ने संसद में खुद स्वीकार किया कि पहाड़ पर कर्फ्यू जैसे हालात बन गए हैं। सांसद के इस बयान से भी समझा जा सकता है कि इस साल जंगली जानवरों का आंतक कैसे अपने चर्म पर है। आंकड़े बताते हैं कि साल 2025 में अब तक 547 हमले दर्ज हो चुके हैं…
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