‘ कोई व्यक्ति, नेता या राजनीतिक दल जब सोसाइटी में दबंग समझी जाने वाली बिरादरी की तरफ एक हद से ज्यादा झुकाव और एग्रेशन दिखाने लगे तो बाकी पिछड़े और उपेक्षित वर्ग न सिर्फ उस व्यक्ति, नेता या पार्टी से किनारा कर लेते हैं, बल्कि अंदरखाते उसके खिलाफ एकजुट भी हो जाते हैं।’ यह एक सामान्य फिनोमिना है। हरियाणा चुनाव के नतीजे कुछ हद तक इसी को दिखाते हैं। चुनाव से पहले ही कांग्रेस ने जाट कम्युनिटी की तरफ जिस तरह का झुकाव और एग्रेशन दिखाना शुरू कर दिया था…
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