आग की लपटें तेज थीं। खिड़की तोड़कर पहले पत्नी को बाहर धकेला, फिर साली और एक बच्चे को बाहर फेंका। तब तक लपटें इतनी तेज हो गईं कि ऊपर की बर्थ पर बैठे दो बच्चों को बचा नहीं सका। मैं बच गया, लेकिन वह जिंदा जल गए। जैसलमेर बस हादसे में झुलसे पीर मोहम्मद की ये तड़प आग में जलने से भी ज्यादा दर्द दे रही है। हादसे में वे तो बच गए…
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