भारत में बच्चों के कुपोषण की तस्वीर बदल रही है। चुनौती अब सिर्फ भोजन की कमी तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह कुपोषण और मोटापे के दोहरे बोझ में बदल रही है। एक ताजा स्टडी के मुताबिक अब एक ही बच्चा बचपन में पहले दुबलापन और कुछ ही वर्षों बाद मोटापे का शिकार हो रहा है। इसे वैज्ञानिक ‘डबल बर्डन ऑफ मालन्यूट्रिशन’ यानी कुपोषण के दोहरे बोझ के रूप में देख रहे हैं। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (सीएमसी) वेल्लोर और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए और द लैंसेट रीजनल हेल्थ-साउथ ईस्ट एशिया में प्रकाशित एक नए अध्ययन में कुछ बच्चों को जन्म से नौ वर्षों तक ट्रैक किया गया। इस स्टडी में शामिल बच्चों में पाया गया कि अधिकांश का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) उनके पहले पांच वर्षों के दौरान सेहतमंद स्तर पर था। सात साल की उम्र में करीब 26% बच्चे दुबले थे…
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