सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में कहा कि यदि दो वयस्कों में सहमति से बना रिश्ता बाद में टूट जाता है या दोनों के बीच दूरी आ जाती है, तो इसे शादी का झूठा वादा बताकर रेप का केस नहीं बनाया जा सकता। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों से न केवल न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ पड़ता है…
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