उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कहा कि आपातकाल के दौर में संविधान की प्रस्तावना में संशोधन करके जोड़े गए ‘धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी’ शब्द नासूर बन गए हैं। प्रस्तावना पवित्र है और इसे बदला नहीं जा सकता, जोड़े गए शब्द सनातन की भावना का अपमान हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा- आपातकाल के दौरान 1976 में प्रस्तावना में डाले गए शब्द नासूर थे और उथल-पुथल मचा सकते थे। ये बदलाव संविधान के साथ विश्वासघात का संकेत देते हैं। यह देश की हजारों सालों की सभ्यता-संपदा और ज्ञान को छोटा करने के सिवा कुछ नहीं है। धनखड़ ने प्रस्तावना को एक बीज बताया…
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