8-9 मई की वो रात हम भूल नहीं सकते। पाकिस्तान की गोलीबारी से बचने के लिए बीवी-बच्चों और चुनिंदा सामान को लेकर रातोरात गांव खाली करना पड़ा था। बंकर होते तो उनमें छुप जाते। गांव नहीं छोड़ना पड़ता।’ इतना कहते-कहते पुंछ के मंडी गांव के सरपंच रफीक मदनी रोने लगे। उन्होंने बताया कि हमें 70 बंकर चाहिए। सर्वे हुए 4 महीने हो चुके। लेकिन…
Read More