‘नागरिकों की व्‍यक्तिगत आजादी सबसे ऊपर है। किसी भी निर्दोष को बिना वैधानिक प्रक्रिया के जेल नहीं भेजा जा सकता।’ यह बात इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को पुलिस कमिश्‍नरेट प्रणाली में शांति भंग की धाराओं के दुरुपयोग पर कही। न्‍यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्‍यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद उर्फ लल्‍लू की याचिका पर सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने पाया कि मंसूर को 8 दिन तक अवैध रूप से न्यायिक हिरासत में रखा गया। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन मानते हुए कोर्ट ने यूपी सरकार को पीड़ित को 2 लाख रुपए मुआवजा देने का निर्देश दिया। यह राशि राज्य सरकार को 6 सप्ताह के भीतर अदा करनी होगी। हाईकोर्ट ने कहा- एसीपी बारा और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने बीएनएसएस की धाराओं 170…
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