स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का विवाद अब यूपी से निकलकर उत्तराखंड तक पहुंच गया है। यूपी के मंत्री धर्मपाल सिंह जहां साफ कह चुके हैं कि सरकार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं मानती। वहीं, बद्रीनाथ धाम से जुड़ी डिमरी पंडितों की पंचायत अविमुक्तेश्वरानंद को ही शंकराचार्य मान रही। यही वजह है कि उन्हें गाड़ू कलश (तेल कलश) यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया जा चुका है। डिमरी समाज का कहना है कि उनका फैसला किसी मंत्री या सरकार के बयान के आधार पर नहीं…
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बद्रीनाथ धाम के पुजारी बोले
